Top 10 Munawwar Rana Shayari on Maa in Hindi

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Munawwar Rana

ये ऐसा कर्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता, मैं जब तक घर न लौटूं मेरी मां सजदे में रहती है।

चलती फिरती हुई आंखों से अज़ान देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है।

अभी जिंदा है मां मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा, मैं घर से जब निकलता हूं दुआ भी साथ चलती है।

तेरे दामन में सितारे हैं तो होंगे ऐ फलक़, मुझको अपनी मां की मैली ओढ़नी अच्छी लगी।

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।

मैंने कल शब चाहतों की सब किताबें फाड़ दीं, सिर्फ एक कागज पर लिखा लफ्ज़-ए-मां रहने दिया।

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई, मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई।

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है, मां दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।

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