ashura ki dua in hindi

Yome Ashura ki Dua in Hindi and English

अस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू 10 मुहर्रम यानी यौमे आशूरा (Youme Ashura) ये दिन बड़ा ही अफ़ज़ल दिन है। इस दिन हमें आशूरा की दुआ (Ashura ki dua) जरूर पढ़नी चाहिए।
शबे आशूरा (Shabe Ashura) और यौमे आशूरा (Youme Ashura) हमें अल्लाह की ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए। क्योंकि इस मुबारक दिन कोई भी नेक और जायज़ दुआ ख़ाली नहीं जाती। यहाँ नीचे हम बताने वाले हैं यौमे अशुरा की दुआ हिंदी मे (Youm e Ashura ki dua) और आपको आशूरा की नमाज़ कैसे पढ़नी है (Ashura Ki Namaz Kaise Padhe) और आशूरा की नमाज़ की नियत (Ashura Ki Namaz Ki Niyat) कैसे करनी है, ये सब नीचे पोस्ट में दिया गया है।

आशूरा की फज़ीलत – Ashura ki fazilat

youm e ashura mubarak
youm e ashura mubarak

ये दुआ बहुत ही मुजर्रब है। हज़रते इमाम जैनुल आबिदीन रदीअल्लाहु तअला अन्हु से रिवायत है कि जो शख़्स आशूरा के दिन तुलूअ आफ़ताब से गुरूबे आफ़ताब तक इस दुआ को पढ़ ले या किसी से पढ़वा कर सुन ले तो इंशाअल्लाह तआला यक़ीनन साल भर तक उसकी जिंदगी का बीमा हो जायेगा। हरगिज़ हरगिज़ मौत न आयेगी और अगर मौत आनी ही है तो अजीब इत्तिफ़ाक है कि पढ़ने की तौफीक़ न होगी।

सबसे पहले हमें ग़ुस्ल करना है। बाद ग़ुस्ल के हमें दो रक्अत आशूरा की नफ़्ल नमाज़ पढ़ना है। जिसकी नियत इस तरह होगी।

आशूरा की नमाज़ की नियत – Ashura Ki Namaz Ki Niyat

आशूरा की दुआ (Ashura Ki Dua) पढ़ने से पहले आशूरा की नमाज़ (Ashura Ki Namaz) भी पढ़ी जाती है, जिसका तरीका ये है-
नियत की मैंने दो रक्अत नफ़्ल नमाज़ की वास्ते अल्लाह तआला के मुँह मेरा काबे शरीफ की तरफ और अल्लाहु अकबर कहके हाथ बाँध लेना है।
[नफ़्ल नमाज़ में वक़्त का नाम लेना ज़रुरी नहीं।]

आशूरा की नमाज़ का तरीका – Ashura Ki Namaz Ka Tariqa

नमाज़ में आपको दोनों रक्अत में सुरह फातिहा के बाद सुरह इखलास 10 मर्तबा पढ़ना है। नमाज़ पूरी हो जाने के बाद आपको एक बार आयतुल कुर्सी पढ़ना है, और नौ बार दुरुदे इब्राहिम पढ़ना है। फिर आशूरा की दुआ (Ashura Ki Dua) पढ़ना है। जो इस तरह है-

 

आशूरा की दुआ हिंदी में – Ashura ki Dua in hindi

ashura ki dua in hindi
ashura ki dua in hindi

दुआ-ए-आशूरा – Dua-e-Ashura

—Youm E Ashura ki Dua—

या काबिला तौबति आदमा यौमा आशूराअ
या फारिज़ा कर्बि जिन्नूनि यौमा आशूराअ
या जामिआ शमलि यअकूबा यौमा आशूराअ
या सामिआ दावति मूसा वा हारूना यौमा आशूराअ
या मुगीसा इब्राहीमा मिनन्नारि यौमा आशूराअ
या राफिआ इद्रीसा इलस्समाए यौमा आशूराअ
या मुजीबा दअवति सालिहिन् फिन्नाकति यौमा आशूराअ
या नासिरा सय्येदिना मुहम्मदीन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमा यौमा आशूराअ
या रहमानददुन्या वल आखिरति व रहीमाहुमा सल्ले अला सय्येदिना मुहम्मदिवं व अला आलि सय्येदिना मुहम्मदिवं व सल्लि अला ज़मीइल अंबियाए वल मुर्सलीना वक्दे हा-जा-तिना फ़िद्-दुन्या वल आखिरति व अतिल उम-रना फी ताअतिका व महब्बतिका व रिदाका व अह-येना हयातन तय्येबतवँ व तवफ्फना अलल ईमानि वल इस्लामि बिरहमतिका या अर-हमर्राहिमीन। अल्लाहुम्मा बिइज्जिल हसनि व अखीहि व उम्मिहि व अबीहि व जद्दिही व बैनिही फर्रिज अन्ना मा नहनु फीह।

— — –फिर सात बार ये दुआ पढ़े– — —

10 Muharram ki Dua

सुबहानल्लाहि मिल अल मीजानि व मुन्तहल इल्मि व मब्लगरिदा व जिनतल अर्शि ला मल्ज़ाआ वला मन्ज़ाआ मिनल्लाहि इल्ला इलैहि।
सुब्हहानल्लाहि अददश्शफअ वल वितरि व अददा कलिमातिल्लाहित तांम्मति कुल्लिहा नसअलु कस्सलामता बिरहमतिका या अर्हमर्राहिमीन।
व हुवा हस्बुना व नेअमल वकील। नेअमल मौला व नेअमन्नसीर। वला हौला वला कूव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलीय्यिल् अज़ीम। वसल्लल्लाहु तआला अला सय्येदिना मुहम्मदिवं व अला आलिही व सहबिही व अलल मुअमिनीना वल मुअमिनाति वल मुस्लिमीना वल मुस्लिमाति अददा जर्रातिल वुज़ूदि व अददा मुअलूमातिल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।
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नोट- लिखने और पढ़ने में जो गलती हो गयी हो उसे अल्लाह तआला माफ़ करे। आमीन!

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DUA-E-ASHURA in English

Dua-e-Ashura is also called an Insurance for a Year’s Life.

HADITH:
Hazrat Imam Zainul Abidain (Radi Allah Anhu) reports that who ever recites this dua(Dua-e-Ashura) on the tenth of Muharram, Any time after sunrise and before sunset, or listens to its recitation from someone else, Allah Ta’ala will certainly make it an insurance for a years’ life for him, by keeping death away from him. However, if one is to become the victim of death in that year, they will by some strange coincidence not remember to recite it.

Below is the Dua-e-Ashurah

Ya Qaabila Tawbati Adama Yawma ‘Ashuraa-a,
Ya Faarija Karbi Zhin-Nuwni Yawma ‘Ashuraa-a,
Ya Jaami’a Shamli Y’aquwba Yawma ‘Ashuraa-a,
Ya Saami’a D’awati Musa wa Haruna Yawma ‘Ashuraa-a,
Ya Mu-ghisha Ibrahima mi-nanaa-ri Yawma ‘Ashuraa-a,
Ya Rafi’a Idrisa ilas-samai Yawma ‘Ashuraa-a,
Ya Mujeeba da’wati salihin finna-qati Yawma ‘Ashuraa-a,
Ya Nasira sayyidina Muhammadin sal-lalahu ‘alayhi wa sallama Yawma’Ashuraa-a,
Ya Rahmanad-duniya wal-akhirati Wa Rahima-humaa Salli ‘alasayyidina Muhammadiw-wa ‘ala aale sayyedina Muhammadiw-wa salle ala jamee’al ambiyaai wal-mursaleena waqdihaajaa-tinafid-dunya wal-akhirati wa atil ‘umrana fee taa’atika wamahabatika wa ridakawa wa-ahyinaa
hayawtan tayeeba tuwwa tawaffana ‘a-lal-emaani wal-islamibi-rahmatika Yaa arhamar-rahimeen Allahumma bi-‘izzil hasani wa akhihiwa ummihi wa abihi wa jaddihi wa banihi far-rij ‘anna maa nahnu feehe.

After reading the above dua, Read the following dua 7 times.

Subha-nallahi mil al-meezani wa muntahal-‘ilmi wa mabla-ghar-rida wa zinatal-‘arshi la mal-jaa-aa wala mantajaa-aa mi-nallahi illa-ilay. Subha-nallahi ‘adadash-shaf-‘ia wal-witri wa ‘adadakalimaa tilla-hit-tammati kullihaa nasalu-kaslamata bi-rahmatika yaaarhamar-rahimeen.
wa-hu-wa hasbunaa-wa-nai’-mal-wakeel. Ni’-mal-mawla wa-ni’man-naseer. wala-haw-la wala quwwata illa-billahil-‘alee-yil-‘azeem. wa salla-lahu ta’ala ‘ala sayyidina Muhammadiw-wa ‘ala alihi wasahbihi wa ‘a-lal mumineena wal muminati wal muslimeena wal muslimati’adada zarratil wujudi wa ‘adada ma’-luwmaa tillahi wal-hamu-illahirabbil-‘alameen.

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